Vineet Singh

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Vineet Singh

Vineet is Sr. Print and Broadcast Journalist, Author, Columnist, Strategist, Believer, Dreamer and Performer. who covers topics pertaining to Indian politics, Crime Higher Education, tourism, Archeology and Society. He is Presently Working with Leading Hindi News Paper.

  • Kota, Rajashtan
  • +91 75990 31853
  • vineet.singh@in.patrika.com
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Me

Professional Experineces

Started Career in Journalism As Trainee Reporter in Print Media and achieved Key Positions in Various Medium of Media Just Like Print, Electronic and Digital. As Journalist Exposed so many Scams like Pension Scheme, Scholarship Scheme and Drugs Mafia Network. During My Career Interviewed With Pm Narendra modi, Former PM Chandarshakhar, IK Gujral, VP Singh, Atal bihari vajpayee and so many National and International Political Leaders.I have also interviewed Dacoit Nirbhay Gujjar and Phoolan Devi.

work Experineces 18 Years As Journalist
Print Media 12 Year As Special correspondent With Rajasthan patrika, Outlook hindi, Danik Jagran, sahara samay
TV journalism 06 Year As Producer with CNEB, ANI, Janmat Tv (live india)
Digital media work with rajasthan patrika last 2 year

News

Coverage for Rajasthan Patrika,Dainik Jagran,India Today,Live India, CNEB News, Outlook Hindi, ANI etc.

Articles

Asia Pacific

Education

PhD in Mass Communication and Master Degree in Journalism and Mass Communication And Ex Faculty, Department of Mass Communication and Journalism, Bareilly College bareilly india

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  • गांधी और अम्बेडकर...

    गांधी और अम्बेडकर...

    गांधी और अम्बेडकर ... इंसान होते हुए भी वो कर गये जिसके पास तो क्या दूर दूर तक कोई दूसरा नजर नहीं आ रहा... इसे भारतीय समाज की चिंतन हीनता कहें या अवसरवादिता ... दौनों की याद वोट वैंक बढ़ाने के लिए आती है...लोगों की दिशा और दशा सुधारने के लिए नहीं ... नहीं तो स्कूलों की संख्या मैखानों से ज्यादा होती... अम्बेडकर ने आरक्षण मांगा था दबे कुचले लोगों को मजबूत बनाने के लिए ... लेकिन वोट बैंक की राजनीति ने आरक्षण को इतना विकृत कर दिया कि दबे कुचले लोग तो मजबूत नहीं बन पाये लेकिन छुटभइ्यों की राजनीति चमक गयी... जिनके दम पर सत्ता का सुख चचा उन्हें बना दिया विकलांग.... आरक्षण की बैसाखी पकड़ा कर... हो सकता है आप कहें कि में कथित सवर्ण परिवार से संबध रखता हूं ... इसलिए आरक्षण का मखौल उड़ा रहा हूं... कथित इसलिए कि आजादी की जंग में इस परिवार ने इतना कुछ गंवाया कि दो पीड़ियों तक रोटी पर नमक मिर्च लगा कर वक्त काटा.. लेकिन रहे फिर भी सवर्ण.... मेरा मानना है कि गांधी हों या अम्बेडकर उनकी आत्मा को तब तक शान्ती नहीं मिलेगी जबतक ... हर बच्चे को स्कूल नसीब नहीं होगा... हर एक कामगार को काम नहीं मिलेगा.... जब तक कोई बेघर नहीं रहेगा... दौनों की लड़ाई और मंशा तो शायद यही थी... न कि नये शासक बनाने की .... मूर्ति पूजकों के इस देश में व्यक्ति की पूजा तो की जाती है लेकिन विचारों का अचार डाल डिब्बे में बंद कर दिया जाता है....
  • बहुत रोना आया..

    बहुत रोना आया..

    नक्सलवाद पर माननीय राष्ट्रपति महोदया ने भी आंसू बहाये.... लेकिन कमर तोड़ मंहगाई पर् एक शब्द भी नहीं बोलीं ... बोलतीं भी तो कैसे .... दलितों की जमीन कब्जाने से लेकर राष्ट्रपति बनने तक का कांग्रेसी कर्ज जो उन्हें चुकाना था.... वैसे भी उन्हें एक जमाना गुजर गया होगा आटा-दाल-सब्जी खरीदे हुए .... राष्ट्रपति महोदया जनता का पेट पर सरकारें लात मारेंगी तो नक्सलवाद और आतंकवाद खत्म नहीं होंगे बल्कि और बढ़ेंगे ..... ये आप जैसे महान राजनीतिज्ञ कब समझेंगे.... एनडीटीवी पर कमाल सही कहते हैं पहाड़ के नीचे आना हाथी की मजबूरी है.... सो निभाओ
  • धन्यवाद कपिल सिब्बल जी.... हार्दिक धन्यवाद..

    धन्यवाद कपिल सिब्बल जी.... हार्दिक धन्यवाद..

    मेरे बाप चांहते थे कि मैं इंजीनियर बनूं .... लेकिन नहीं बन सका.... इंजीनियर क्या खाक बनता इंटर में गणित की छह-छह किताबें देखकर पसीना आ जाता था.... सोचा इंजीनियर बाद में बनीयो बेटा... पहले रट्टा मार और पास हो जा... चलो कोई नहीं देर से ही सही हमारी सरकारें नौनिहालों के लिए कुछ सोचने तो लगीं... सबसे पहले देश के नौजवानों को मेरी ओर से हार्दिक बधाई....फिर कपिल सिब्बल का हार्दिक आभार.... जिन्होंने हम जैसे यूपी और बिहार के छात्रों के लिए शिक्षा तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में समान अवसर प्रदान करने के लिए केन्द्र सरकार वर्ष 2013 से पूरे देश में विज्ञान और गणित संकाय के लिए 'एक राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा' आयोजित करने का इरादा बनाया....ताकि मेडिकल और इंजीनियरिंग में प्रवेश के इच्छुक छात्रों को सहूलियत हो सके..... वाकई ये सुखद खबर है... खासतौर पर पिछड़े राज्यों के छात्रों के लिए... पिछड़े से मेरा मतलब स्कूली शिक्षा के मामले में पिछड़ों के लिए... किन्तु एक सवाल भी है.... पूरे देश में सिलेबस तो समान होगा .... लेकिन कॉपी जांचने का तरीका कैसे एक जैसा करेंगे.... ताकि नम्बर समान आ सकें... यूपी में ठेके पर कॉपियां कैसे जंचती हैं किसी से छिपा नहीं है.... इसीलिए तो बच्चे अच्छे नम्बर पाने के लिए जांच देवता को कॉपी में रखकर नोट तक भेंट करने से नहीं चूकते.... वहीं दूसरी ओर क्या मास्टर साब उस सिलेबस को पढ़ाने लायक योग्यता रखते होंगे ... या साफ-साफ कहूं तो मास्टरों की मंसा होगी नये सिलेबस को पढ़ाने की... क्योंकि उसे पढ़ाने के लिए साब को पढ़ना भी होगा... और वो काम यूपी के मास्टरों से होने से रहा.... क्योंकि वो एक इसी काम को छोड़कर सबकुछ करने में माहिर हो चुके हैं.... चुनाव लड़ना लड़वाना है... वोटर लिस्ट बनानी है... और तो और अब राशन बंटवाने से लेकर किस गांव कितने पाखाने बने हैं का हिसाब भी मास्टर ही रखते हैं... लेकिन पढ़ाने का हिसाब यूपी में कोई नहीं रखता... कपिल सिब्बल जी सिलेबस तो समान कर रहे हैं... पढ़ाने और कांपियां जांचने का तरीका भी समान करा दें तो आपका एहसान यूपी के बच्चे तो कम से कम नहीं भूलेंगे .... एक एहसान और कर दीजिये.... गणित और विज्ञान के साथ साथ अंग्रेजी का सिलेबस और समान करा दीजिये ... पढ़ने और पढ़ाने की गारंटी के साथ.... कम से कम मेरी आने वाली पीढ़ी जरूर आपका एहसान मानेंगी.... क्योंकि .... सच कहूं मेरी अंग्रेजी निहायत खराब है... और इसकी जड़ यूपी की शिक्षा पद्धति और मेरे आदरणीय मास्टर ही रहे हैं.... एक बार मेरे निवेदन पर जरूर विचार कीजियेगा.... धन्यवाद ...कपिल सिब्बल जी... हार्दिक धन्यवाद...।
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