• दारोगा बनाने का ठेका ले रहा "सीएम का भतीजा "

             शहर के एक होटल में खुलेआम वर्दी की बोलियां लग रही हैं। कीमत है- पांच लाख। ‘खाकी’ के सौदागर खुद को सैफई का रहने वाला और एक बड़े नेता का भतीजा बता रहे हैं। दर्जनों युवक उनके झांसे में फंस चुके हैं। पैसा देने के बाद घर लौटे रामपुर के कुछ अभ्यार्थियों ने जब पार्टी नेताओं से संपर्क साधा तो पोलपट्टी खुली। 
      दलालों की दखलंदाजी के बाद साल 2011 में रद्द हुई दारोगा भर्ती तीन साल बाद कोर्ट की निगरानी में चार अगस्त से फिर शुरू हुई है। लिखित परीक्षा पास कर चुके अभ्यार्थियों का बरेली, लखनऊ, आगरा और कानपुर पुलिस लाइंस में सोमवार से शारीरिक इम्तिहान चल रहा है। बरेली में अभ्यार्थी बाद में पहुंचे ‘नौकरी का ठेका’ लेने वालों ने पहले ही डेरा डाल दिया। फतेहपुर में पंजीकृत (यूपी 75 एल 67**) लक्जरी गाड़ी में सवार लोगों ने शनिवार को ही स्टेशन रोड स्थित एक होटल को अपना ठिकाना बना लिया। उनके पास पुलिस लाइंस बरेली पर शारीरिक परीक्षा देने आ रहे अभ्यार्थियों की पूरी सूची भी थी। इसके बाद उन्होंने यहां आने वाले अभ्यार्थियों को इस सूची से छांटकर उनसे संपर्क साधना शुरू कर दिया। सोमवार को जब भर्ती शुरू हुई तो कुछ गुर्गे शिकार की तलाश में पुलिस लाइंस के इर्दगिर्द मंडराने लगे। कुछ ने पड़ोस के शहरों में कूच कर गए। गुर्गो के जाल में अब तक दर्जनों युवक फंस चुके हैं। शिकार बने अभ्यार्थियों से पांच-पांच लाख में भर्ती कराने का सौदा तय किया है।
    भतीजा! ले रहा गारंटी
     गिरोह का सरगना बबलू यादव खुद को सैफई का रहने वाला और सूबे की सरकार के बड़े नेता का भतीजा बताकर दारोगा बनाने की गारंटी ले रहा है। लोगों का विश्वास जीतने के लिए वह कई कथित पुलिस अफसरों के नंबर (9415902***, 8857676***,9627604***और 9454358***) भी दे रहा है। इन नंबरों पर बात करने के बाद अभ्यार्थियों का यकीन बढ़ जाता है और ठगों के जाल में फंस जाते हैं। दर्जनों युवा दौड़ में फिसड्डी रहने के बावजूद सौदे की तय रकम देकर दारोगा बनने का ख्वाब पाल बैठे हैं। 


    ऐसे खुली पोल
    भर्ती गिरोह ने रामपुर से आए एक युवक को अपना शिकार बनाया। दोस्त के कहने पर युवक बबलू को तीन लाख रुपये की पहली किस्त देने को राजी हो गया। जब पैसा लेकर वह बरेली पहुंचा तो किसी सरकारी गेस्ट हाउस की बजाए ‘मुख्यमंत्री के भतीजे’ को स्टेशन रोड के होटल में देखकर उसे कुछ शक हुआ। युवक भतीजे की लच्छेदार बातों में फंस गया और पैसा दे बैठा, लेकिन रामपुर वापस लौटने पर उसने अपना शक दूर करने को समाजवादी पार्टी में पदाधिकारी अपने दूर के रिश्तेदार से संपर्क साधा और पड़ताल की। उन्होंने मोबाइल नंबरों पर बात की तब कहीं जाकर पूरा खेल खुला। असल में यह ठगों का गिरोह है। पैसे फंसे होने के कारण पुलिस कार्रवाई करने के बजाए युवक सीधे रुहेलखंड के कद्दावर मंत्री की शरण में चला गया।ठगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्हें किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। जो लोग ठगी के शिकार हुए हैं वह तत्काल रिपोर्ट दर्ज कराएं। भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है।
    झांसे में न आएं युवा 
    डीआइजी आरकेएस राठौर ने मातहतों को जल्द से जल्द ठगों को धर दबोचने के निर्देश दिए हैं। इसी के साथ उन्होंने दारोगा बनने का ख्वाब सजोए बैठे युवकों को सलाह दी है कि वह ठगों के झांसे में न आएं। डीआइजी ने कहा कि उत्तर प्रदेश भर्ती बोर्ड में अब राजनैतिक और प्रशासनिक दखलंदाजी का सवाल ही नहीं उठता। कोई कितनी भी कोशिश क्यों न कर ले योग्यता को दरकिनार कर नियुक्ति नहीं हो सकती। इसलिए युवा मेहनत पर यकीन करें और ठगों के झांसे में आकर पैसे व समय दोनों खराब न करें। 


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