Vineet is Sr. Print and Broadcast Journalist, Author, Columnist, Strategist, Believer, Dreamer and Performer. who covers topics pertaining to Indian politics, Crime Higher Education, tourism, Archeology and Society. He is Presently Working with Leading Hindi News Paper.
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Professional Experineces
Started Career in Journalism As Trainee Reporter in Print Media and achieved Key Positions in Various Medium of Media Just Like Print, Electronic and Digital. As Journalist Exposed so many Scams like Pension Scheme, Scholarship Scheme and Drugs Mafia Network. During My Career Interviewed With Pm Narendra modi, Former PM Chandarshakhar, IK Gujral, VP Singh, Atal bihari vajpayee and so many National and International Political Leaders.I have also interviewed Dacoit Nirbhay Gujjar and Phoolan Devi.
work Experineces18 Years As Journalist
Print Media12 Year As Special correspondent With Rajasthan patrika, Outlook hindi, Danik Jagran, sahara samay
TV journalism 06 Year As Producer with CNEB, ANI, Janmat Tv (live india)
Digital media work with rajasthan patrika last 2 year
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PhD in Mass Communication and Master Degree in Journalism and Mass Communication And Ex Faculty, Department of Mass Communication and Journalism, Bareilly College bareilly india
पहले तो कालेज में दाखिला मिलना असम्भव, मिल गया तो नौकरी मिलना मुश्किल, मिल गयी तो प्रमोशन आसान नहीं और जब कुछ मिलना ही नहीं तो देना क्यों। क्यों सीमा की चौकसी कर डकैतों को आराम की नींद सोने दीया जाये। क्यों उनके पापों को दबाने के लिए निरीह जनता पर बल प्रयोग किया जाये... जिस मुल्क में अपना कुछ न हो उससे बेहतर है अपना नया मुल्क ही क्यों न बना लिया जाये.......नये विखंडन की नींव डालने वालो एक बार सोचो.... ये विखंडन मुल्क को खंडित कर कहीं विश्व का भूगोल न बदल दे.........
राजशाही और तानाशाही में बड़ा ही कम फर्क होता है... तानाशाह और राजा या सामंत राष्ट्र को अपनी बपौती समझते हैं और प्रत्येक संसाधन का दोहन एवं प्रजा का शोषण करना अपना परम कर्तव्य समझते हैं ... उनको लगता है कि ईश्वर ने उन्हें जन्म ही इस वास्ते दिया है। लेकिन, कथित भारतीय गणतंत्र के संवैधानिक सिद्धान्तों में न तो राजशाही के लिए जगह है न तानाशाही के लिए ....जिस तरह सिद्धान्त और व्यवहार में आधारभूत भेद होता है ठीक उसी तरह भारत में लोकशाही और राजशाही के बीच है। सत्ता बची रहे इसके लिए नवीन व्यवस्था के सामन्तों यानि जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त से लेकर जनता की आवाज को दबाने के लिए रावण लीला का मंचन कर जनहित में आवाज उठाने वालों की हत्या तक कराने से कोई गुरेज नहीं किया जाता।
असम में बसाये गये घुसपैठिये हों या फिर कश्मीर में प्राचीन धार्मिक यात्राओं के रोकने का कुचक्र रचने वाले गैरमुल्क परस्त लोग .... सत्ता की सौदेबाजी करने की हैसियत जुटा लेते हैं और लोकशाही का चोला ओढ़े कथित राजघराने अपनी विलासिता को बचाये रखने के लिए इन अलगाववादियों से ठीक वैसे ही सौदे करने लगते हैं जैसे नादिरशाह ने गोरे व्यापारियों के साथ किये। नतीजा असम जैसी न रुकने वाली हिंसा.... कश्मीरी पंडितों जैसा पलायन....खालिस्तान जैसे नये मुल्क की मांग...अपनी ही जमीन पर कदम रखने के लिए बिहारियों की परमिट व्यवस्थाभरे बयान.... के तौर पर सामने आते हैं। किसी भी राष्ट्र का विखंडन उसकी नीतियों की देन होता है। भारतीय गणतंत्र को विखंडित करने की ऐसी ही नीतियां हिन्दुस्तानी गोरों की सरकार रच रही है। मुल्क उनका है नहीं, प्रवास पर आये हैं सत्ता राजशाही की देन है सो उसे बचाने के लिए जिसे जैसे खरीदना हो खरीद लो।
असम में विदेशियों को बसा दो सरकार बन जायेगी। कश्मीर में हिन्दुओं को भगा दो, समर्थन देने वाले मिल जायेंगे। हिन्दुओं की प्राचीन अमरनाथ यात्रा को बंद करा दो, देश कश्मीर तो क्या देश भर में काफिरी जुमला पढ़ने वाले गले लगा लेंगे। बहुसंख्यक हो चुके कथित अल्पसंख्यकों को मुफ्त में धार्मिक यात्राएं कराओ वोट मिल जायेंगे। व्यवस्था को बुद्धि से नहीं आरक्षण से चलवा लो लूट के मौके मिल जायेंगे। परीक्षा खत्म करादो ग्रेडिंग से चूतिये पैदा करो ताकि राजकाज आसान हो जायेगा।
फूट डालो और राज करो की नीति कहीं सवर्णों को एक अलग राष्ट्र की मांग के लिए नया अलगाववादी न बना डाले। कथित लोकशाही को समझलेना चाहिए कि यदि अलगाव का यह बीज पड़ गया तो उससे निपट पाना सबसे ज्यादा मुश्किल होगा। वो इसलिए कि जिस फौजी ताकत का इस्तेमाल कर हिन्दुस्तानी सत्ता देश में आने वाली हर मुसीबत से निबटती रही है उसका अधिकांश वर्दीधारी हिस्सा सवर्ण और हिन्दू ही है।