Vineet Singh

I am a Writer

Vineet Singh

Vineet is Sr. Print and Broadcast Journalist, Author, Columnist, Strategist, Believer, Dreamer and Performer. who covers topics pertaining to Indian politics, Crime Higher Education, tourism, Archeology and Society. He is Presently Working with Leading Hindi News Paper.

  • Kota, Rajashtan
  • +91 75990 31853
  • vineet.singh@in.patrika.com
  • www.facebook.com/dr.vineetsingh
Me

Professional Experineces

Started Career in Journalism As Trainee Reporter in Print Media and achieved Key Positions in Various Medium of Media Just Like Print, Electronic and Digital. As Journalist Exposed so many Scams like Pension Scheme, Scholarship Scheme and Drugs Mafia Network. During My Career Interviewed With Pm Narendra modi, Former PM Chandarshakhar, IK Gujral, VP Singh, Atal bihari vajpayee and so many National and International Political Leaders.I have also interviewed Dacoit Nirbhay Gujjar and Phoolan Devi.

work Experineces 18 Years As Journalist
Print Media 12 Year As Special correspondent With Rajasthan patrika, Outlook hindi, Danik Jagran, sahara samay
TV journalism 06 Year As Producer with CNEB, ANI, Janmat Tv (live india)
Digital media work with rajasthan patrika last 2 year

News

Coverage for Rajasthan Patrika,Dainik Jagran,India Today,Live India, CNEB News, Outlook Hindi, ANI etc.

Articles

Asia Pacific

Education

PhD in Mass Communication and Master Degree in Journalism and Mass Communication And Ex Faculty, Department of Mass Communication and Journalism, Bareilly College bareilly india

0
Interviewed so far
0
Work Experience Year
1000000
Reader
0
current projects
गंड योग- जो देता कुछ नहीं सिर्फ और सिर्फ लेकर ही जाता है लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
गंड योग- जो देता कुछ नहीं सिर्फ और सिर्फ लेकर ही जाता है लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
  • गंड योग....

    (नोटः- इस लेख के सभी कलाकार वास्तविक हैं... पहचान छुपाने के लिए उनके नामों थोड़ा सा परिवर्तन किया गया है... यदि किसी के जीवन से या चरित्र से घटनाएं मेल खाती हों तो इसे संयोग न समझें यह लेखक का जान बूझ कर किया गया दुस्साहस है ... इसके लिए आप जो चाहें उखाड़े ... लेखक खोल कर तैयार है... ज्यादा दिमांग नहीं लगाते ... लेख ही खोल रहा हूं ... कुछ और नहीं गंदे लोग गंदी सोच.... जिसको बुरा मानना है वो अवश्य बुरा माने क्योंकि वो अपना कुछ उखाड़ नहीं सकता, क्योंकि हम खोलने या खुलवाने पर विश्वास नहीं करते... दूसरों की औकात बताने से पहले अपनी औकात देखाते हैं ... जिसकी यूएसपी अभी ठीक-ठाक है...)

    ये प्रकृति भी बड़ी अजीब चीज है .. लगता है जैसे सबकुछ पहले से किसी प्रोग्रामर ने प्रोग्राम करके सृष्टी के यूपीएस में फिट कर दिया हो.... दिमांग मत खुजलाईये... मैने ऊपर जो हैडलाइन दी है वो सही है... उसमें कहीं भी गलती नहीं ....जो मात्रा आप खोज रहे हैं ... वो है ही नहीं... बेवजह डिस्टर्ब कर दिया मुझे... हां तो में बात कर रहा था प्रकृति की ... सृष्टी की ...हम रोजाना न जाने कितने ख्वाब बनाते और बिगाड़ते हैं.... अगर मनचाहा हो जाये तो चीखते और चिल्लाते हैं कि देखा मैने कर डाला... अगर न हो पाये तो खा जाते हैं जान खुदा की... और अंत में एक ही जवाब आता है ... जो उसे मंजूर होगा वही होगा... बहुत से लोग हैं जो ज्योतिष... धर्म और भगवान को नहीं मानते... उनसे पूछिये तो जवाब आता है ... जिसे देखा ही नहीं उसे क्या मानें.... आदि आदि.... लेकिन देखा तो हमने हवा को भी नहीं है... फिर भी वो है.. देखा तो हमने प्रांण को भी नहीं है लेकिन वो हैं....ऐसी ही है ज्योतिष मानिये या न मानिये ... ज्योतिष की गहराईयों में यदि आप डुबकी लगायेंगे तो ... अपना अगला पिछला सब निर्धारित पायेंगे... सिर्फ भविष्य ही क्यों इंसान की फितरत.... वक्त की आंधियां सब तो नियत है.... चलिए सबसे पहले बात करते नीयत की... ज्योतिष में कई योग होते हैं... लगभग 27 .... इन योगों का स्वभाव बिल्कुल इंसान से मिलता जुलता है.... जैसे कुछ इंसान होते हैं जो दूसरों का दुख दूर करने में दिन रात लगे रहते हैं ... वैसा ही योग है पुष्य योग... कुछ इंसान हमेशा दूसरों को काटने के लिए दौड़ते रहते हैं ... वैसा ही है सर्प योग.... इसी तरह एक योग होता है गंड योग.... अब समझे ऊपर जो लिखा था सही था.... 27 योगों में यह योग सबसे विशिष्ट होता है .... जिस तरह सांप को दूध पिला कर पटाया जा सकता है... शेर को शोर करके भगाया जा सकता है.... उसी तरह हर बुरे आदमी से कुछ न कुछ हांसिल किया जा सकता है... अच्छा तो देता ही है.... लेकिन एक योग और एक आदमी से कुछ भी हांसिल नहीं किया जा सकता....बल्कि जब ये आते हैं उल्टा सब ले जाते हैं जो भी आपके पास है... चांहे जितना जोर लगा लीजिये... वो योग होता है गंड योग और वो आदमी होता है ... इस योग का स्वामीं... नाम अब कुछ भी दे दे ...चांहो तो उपर की गलती यहां सुधार लो.... आपके आसपास भी ऐसा तमाम लोग होंगे... मेरे आस पास तो पूरी की पूरी लिस्ट छपी पड़ी है..... पता है मुझे जरा सी देर में आपकी फट जाती है.... लेकिन में बताये देता हूं अपनी लिस्ट के कुछ लोगों को... मेरी नहीं फटती... भला क्यों फटेगी... सच्चाई बताऊं भाई पहले ही फटी हुई है... तो अब क्या फटेगी इन गंड योग वालों से .... जब में जवान हुआ तो मुहब्बत का वायरस भी लग गया... एक लड़की को घुमाने पार्क में गया ,,, जैसे ही गुंटर गूं शुरू की.. तभी कान के पास से तेज तेज तालियों की अवाज आयी.... इससे पहले कि में अपनी महबूबा में थोड़ा और डूबता हाय हाय शुरू हो गयी.... एक पल को तो मैं भी डर गया... कि में काम यहां उठा रहा हूं हाय हाय पीछे से आ रही है.... चोंक कर नजर घुमायी तो दो गंडस्वामी हमारा रास देख ... इंटरटेनमेंट टैक्स वसूलने आ धमके थे.... पहले शेर की तरह डराने की कोशिश की फिर सांप की तरह पटाने की कोशिश की लेकिन नहीं माने ... मानते भी कैसे थे भी तो साले गंडस्वामी गंडेश्वर... और मेरा भी तो गंड योग चल रहा था.... सब ले गये जो भी बाप से झूठ बोलकर में आज लाया था.... हो गया मेरा तो प्रेक्टीकल... यही बोलकर तो पैसे मांगे थे.... कोई नहीं दिन गुजरे....फिर महीने और साल....एक दिन मैं देखता हूं कि चंदन के पेड़ पर कई सांप लिपटे हुए हैं... में चंदन का पुजारी था.. सो लगा हटाने... ठाकुर होने के नाते सारे तिकड़म कर डाले... दाम साम दंड भेद और काम तक लगा दिया दांव पर.... जनाब सर्प तो हट गये... लेकिन इसी बीच शुरू गो गया चंदन का गंड योग... ये देखते ही मेरी फिर फट गयी... ठीक वैसे ही जैसे दस साल पहले फटी थी... पिछली बार तो दो ही गंडस्वामी थे... इस बार तो पूरी की पूरी जमात ही गंडेश्वरों से भरी पड़ी थी... मैने आव देखा न ताव सरपट दौड़ लिया... जब रुका तो मुंह हे बस एक ही आवाज निकली हे ईश्वर चंदन की रक्षा करना.... करता भी तो क्या ये गंडस्वामी तो दस साल पहले वालों से भी ज्यादा विकराल थे.... एक एक कर इनके बारे में बताऊं... बड़ा मजा आरिया है मीयां... ले लो ले लो... चुप करके सुनों पहले की कहानी.... गंडेश्वर नम्बर वन... इन महासय का गंड योग बहुत ही विशाल था... इतना विशाल कि नीलम भी अपनी प्रलयंकारी शक्ती भूल टुकड़े टुकड़े हो जाये ... जो इनके हाथ लग जाये तो... इन्हें बस चाहिए था... किस किस से... अपनी मां से बहन से बाप से ... नौकरी देने वाली कम्पनी से वहां काम कर रहे दूसरे लोगों से .... और चंदन से ... इन्होंने इतना मांगा इतना मांगा कि... क्या कम्पनी क्या सहकर्मी... सब की मां-बहन एक हो गयी... जिस वक्त चंदन पे सांप लिपटे हुए थे और उसे डसे जा रहे थे ... ये उस वक्त भी चंदन से मांग रहे थे... थे ना बड़े वाले गंडेश्वर.....
    अब बात गंडेश्वर नम्बर दो की.... ये महासय... क्या लिखूं इनके बारे में ... मेरी तो डिक्शनरी़ ही छोटी पड़ गयी यार.... इन गंडेश्वर के गंड योग का तरीका ही बड़ा शातिराना था... ये बात तो शुरू करते थे देने से... फिर धीरे धीरे धीरे धीरे जब लेना शुरू करते ... तो सब ले मारते.... हां सब ... गंदा दिमाग गंदा ही सोचेगा... लेकिन ये वो भी नहीं छोड़ते थे... अब तो खुश.... जो चांहते थे लिख दिया ना... अब आगे बढ़ने दो.... इनका एक पैंतरा मुझे सबसे ज्यादा पसंद आया.... किसी से कुछ लेने से पहले ये उसे अच्छे से जांचते परखते थे... गलती का कोई मौका ही नहीं छोड़ना चाहते थे... क्या पता किसी दिन जल्दबाजी में लेने गये और दूसरे दिन पता चला कि लेने के बजाय देने पड़ गये... यानि सबसे पहले तय करते कि गोद भरने का कोई चांस तो नहीं है.... जिन दिनों चंदन की मरहम पट्टी चल रही थी... रोजना पहुंच जाते उसके पास कभी भगवान के नाम पर तो कभी बाल बच्चों के नाम पर... हद तो तब हो गयी जब इन्होंने चंदन से एक दिन परमानेंट जुगाड़ मांग डाली... पता है क्या बोले... अरे यार अब रोज रोज कूंदा फांदी नहीं होती... वैसे भी दांत रहे नहीं जो रहे हैं वो टूट जायें इससे पहले ही... मैस का इंतजाम कर दो... वैसे भी अब ढाबों के खाने में मजा कहा रहा... बेचारा चंदन उसको तो जैसे फिर से सांप सूंघ गया हो... उसे कुछ न सूझा क्या करे... मैने भी मौके की नजाकत देख उसे गंड योग का ज्ञान दे डाला... हथियार कोई और बचा ही नहीं था... इस्तेमाल क्या करता.... भुट्टा.... रुको रुको दोस्तो तुमको तो लगता है अब मजा आने लगा... ठहर जाओ साले संपोलो... चंदन से मेरे रिस्ते खराब कराना चांहते हो मुझसे सच्चाई उगलवा कर... जाओ अब नहीं लिखूंगा... हां अब नहीं लिखूंगा और तब तक नहीं लिखूंगा जब तक चंदन आगे की कहानी बयां करने की इजातत नहीं दे देता .... चलो निकलो यहां से मैं भी चला चंदन से बतियाने.... (जारी.... चंदन की अनुमति मिलने पर.)
    गंड योग पार्ट टू----
    हां तो भइया बतिया लिये ... चंदन जी महाराज से... मिल गयी इजाजत.... थैंक गौड ... इस वक्त मेरा गंड योग नहीं चल रहा था... नहीं तो न मिलती इजाजत और न मिलता ये लेख आपको पढ़ने के लिए... याद है न गंड योग की विशेषता मांगने जाओ देकर चले आओ.... चलो अब काम की बात करते हैं... मैं बात कर रहा था गंडेश्वर नम्बर टू की... मामला जुगाड़ तक टिका रहता तो भी कोई बात नहीं थी... वो तो अड़ गये थे गंड गये थे.... चंदन की रूह फना हो रही थी... हद तो तब हो गयी जब घायल चंदन दो दिन के लिए गायब हो गया.... कोहराम मच गया जनाब... कोहराम... सारे गंडेश्वर परेशान हैरान कि कहीं चंदन को कोई काट तो नहीं ले गया... अगर ऐसा हुआ तो उनके स्वप्न महलों का क्या होगा... वो तो रेत के ढेर की तरह ढ़ह जायेंगे... लेकिन बेचारा चंदन क्या करता ... जहां पला बढ़ा... खाद पानी मिला वहीं तो रहेगा और इस उम्र में जायेगा भी कहां.... टहनीयां भी बड़ी हो गयी हैं ... कहीं और जाने की सोचता तो सबसे पहले टहनीयों के सूखने का डर उसे रुला डालता.... इधर कूआ उधर खाई... दो दिन मरहम पट्टी करायी... फिर अड्डे पर लोटते ही शुरू हो गयी मरायी.... इस बर तो हद ही हो गयी....गंडेश्वर नम्बर टू... का परमानेंट जुगाड़ टेनशनन इतना बढ़ गया कि... अब मरे तब मरे... चंदन तो ठहरा चंदन... बाप-दादों डाली ही आदत ऐसी थी कि मेरा गंड ज्ञान भूल... फिर लग गया शीतलता बांटने में... मौका ताड़ गंडेश्वर ने जेब में हाथ डाला... चंदन के चहरे को खिला डाला... लेकिन ये क्या ... इलाज के रुपयों की चमक तो दूर खेरीज की खनक तक न सुनाई दी... बस एक लम्बी खर्रा जैसी कोई चीज दिखाई दी,,,, खर्रा याद आया या नहीं... यार वही चीज जिसकी बजह से हमको मिली थीं ये डिग्रीयां... पेपरों में थी जिनकी खुशियां.... हां वही... समझ गये साले सब पढ़े तो यूपी बोर्ड के ही हैं... हां मालुम है तुम बिहार से हो.... बस करो आगे बढ़ने दो... खर्रा था या फिर भूखहड़ताल पर बैठे विरोधी दल के नेताजी का मांग पत्र.... एक बार तो लगा जैसे नयी नवेली दुल्हन की डिमांड लिस्ट है... चूड़ी, बिछिया, लाली, पाउड़र, चड्डी बनियान ही नहीं, नयी गाड़ी और अलग मकान तक की मांग थी.... मुंह भी ऐसे ही फुलाये बैठे थे... नहीं दोगे तो मर जायेंगे.... देते हो तो तुम्हें मरना ही है... बेचारा चंदन खुद को बचाये या गंडेश्वर को... खुशबू तो उसे फैलानी ही थी... मां का दूध जो पीया था...डिब्बे का पीते तो एक बार कन्नी काट भी लेते.... लेकिन तभी शाख से पत्ते झड़ने लगे... मेरी फैलायी साजिश के चलते लड़ने लगे.... इसी बीच गंडेश्वर को याद आया ... हां एक चीज कहना तो भूल ही गया... मेरी टहनीयां बड़ी हो रही हैं... फलने-फूलने लगी है... बाग में चोर भी टहलने लगे हैं..... जरा उनके लिए भी डंडा उठा लेना माली का रोल भी तुम निभा लेना.... मेरा तो काम ही ऐसा है.... दिन में गुलाबो रात में गुलाब की बेटी से जो मिलना है.... मर गया बेचारा चंदन.... याद आ गये रघुनन्दन.... ये गंडेश्वर हर तरह से दवाब बना रहे हैं... कभी चंदन की खोल रहे हैं तो कभी अपनी खोलकर दिखा रहे हैं... फिर भी न जाने किस किसकी औकात बता रहे हैं... चलो भाई बस करो बहुत हो गया गंडेश्वर वंदन.... इनके लिए इतना ही काफी है... लिखने को तो पूरी किताब लिख जायेगी... क्योंकि इन्हें लक्ष्मी के कब्जाने की भी आदत है... इस हालत पर बस एक शेर कहूंगा... बाकी आगे चुप करूंगा... गंडेश्वर की कोशिश है ... हर हाल में लक्ष्मी मिलनी चाहिए... तेरे घर में गैस हो न हो मेरे घर में जलनी चाहिए... (नोट-कोई भी पात्र काल्पनिक नहीं हैं... यदि किसी घटना या व्यक्ति ये लाइनें मैच कर रही हों तो वह अवश्य बुरा माने क्योंकि वो अपना कुछ उखाड़ नहीं सकता, क्योंकि हम खोलने या खुलवाने पर विश्वास नहीं करते... औकात बताने से पहले औकात नहीं देखा करते। धन्यवाद)
    बस भाई इनके लिए इतना ही... चलिए आगे बढ़ते हैं......लिस्ट बहुत लम्बी है... चंदन से तय हुआ है कि सिर्फ चुनिन्दा गंडेश्वरों के बारे में बात करनी हैं ... लेखक को अपना भी पोल खोलनी है.... इसलिए चुने हुए पके हुए हरामियों का ही चर्चा होगा इस मंच पर ... अरे ये क्या लिख गया मैं... मुझे अपने बारे में भी तो लिखना है इसका मतलब मैं भी बड़ा वाला ... हूं... चलो लिख गया तो लिख गया... अपनी कलम किसी की बांदी थोड़े ही है... जब अपनी पैंट खोलेंगे तभी तो किसी और की खोलने की हिम्मत जुटेगी....
    नेक्सट..... गंडेश्वर नम्बर तीन की कहानी थोड़ा ब्रेक के बाद ....
  • Freedom Voice

    ADDRESS

    Kota, Rajashtan

    EMAIL

    vineet.ani@gmail.com

    TELEPHONE

    +91 75990 31853

    Direct Contact

    Www.Facebook.Com/Dr.Vineetsingh