Vineet Singh

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Vineet Singh

Vineet is Sr. Print and Broadcast Journalist, Author, Columnist, Strategist, Believer, Dreamer and Performer. who covers topics pertaining to Indian politics, Crime Higher Education, tourism, Archeology and Society. He is Presently Working with Leading Hindi News Paper.

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  • vineet.singh@in.patrika.com
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Started Career in Journalism As Trainee Reporter in Print Media and achieved Key Positions in Various Medium of Media Just Like Print, Electronic and Digital. As Journalist Exposed so many Scams like Pension Scheme, Scholarship Scheme and Drugs Mafia Network. During My Career Interviewed With Pm Narendra modi, Former PM Chandarshakhar, IK Gujral, VP Singh, Atal bihari vajpayee and so many National and International Political Leaders.I have also interviewed Dacoit Nirbhay Gujjar and Phoolan Devi.

work Experineces 18 Years As Journalist
Print Media 12 Year As Special correspondent With Rajasthan patrika, Outlook hindi, Danik Jagran, sahara samay
TV journalism 06 Year As Producer with CNEB, ANI, Janmat Tv (live india)
Digital media work with rajasthan patrika last 2 year

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PhD in Mass Communication and Master Degree in Journalism and Mass Communication And Ex Faculty, Department of Mass Communication and Journalism, Bareilly College bareilly india

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  • आईआईटी में इस साल बढ़ेंगी 500 सीटें

    ज्वाइंट एंट्रेंस बोर्ड (जैब) ने इस साल देश भर के 23 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में 500 सीटें बढ़ाने का फैसला किया है। इससे साथ ही एससी-एसटी वर्ग के छात्रों को बारहवीं की बोर्ड परीक्षा के प्राप्तांकों में पांच फीसद अंकों की छूट भी दी जाएगी। जैब के इस फैसले से शैक्षणिक सत्र 2017-18 की संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई एडवांस) में 2.20 लाख छात्रों को शामिल होने का मौका मिल सकेगा। 


    रविवार को आईआईटी चेन्नई में हुई ज्वाइंट एडमिशन बोर्ड (जैब) की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। शैक्षणिक सत्र 2017-18 में प्रवेश परीक्षा (जेईई) आयोजित करने की जिम्मेदारी आईआईटी मद्रास को सौंपी गई है। इसके साथ ही देश भर की 23 आईआईटीज में ज्यादा से ज्यादा छात्रों को एडमिशन का मौका  देने के लिए 500 सीटें बढ़ाने का फैसला हुआ है। जैब के इस फैसले से पिछले साल के मुकाबले इस बार 22 हजार ज्यादा छात्रों को जेईई एडवांस में शामिल होने का मौका मिल सकेगा। इस बार कुल 2.20 लाख छात्र परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।

    परीक्षा की तारीख घोषित 

     बैठक में तय हुआ कि इस बार जेईई एडवांस का आयोजन 21 मई 2017 को किया जाएगा। देश की 31 एनआईटी, 20 ट्रिपल आईटी और 18 जीएफटीआई की लगभग 24 हजार से अधिक और 23 आईआईटी की लगभग 11 हजार सीटों पर एडमिशन का काउंटडाउन सोमवार से शुरू हो गया। इस बार जेईई-मेन परीक्षा दो अप्रेल और जेईई-एडवांस 21 मई को होगी। जेईई-मेन का परीक्षा परिणाम 27 अप्रेल को व एडवांस का परिणाम 11 जून को घोषित किया जाएगा। 

    एससी-एसटी छात्रों को छूट

     जैब की बैठक में एससी और एसटी छात्रों को बारहवीं की बोर्ड परीक्षा में प्राप्त अंकों में पांच फीसद की और छूट दिए जाने का भी फैसला लिया गया। पिछले साल तक इस परीक्षा में 70 फीसद से कम अंक वाले छात्रों को मौका नहीं मिलता था, जबकि इस बार इन छात्रों के लिए  अंकों की न्यूनतम सीमा 65 फीसद रखी गई है। वहीं अनारक्षित वर्ग के छात्रों को न्यूनतम अंक सीमा (75 फीसद) में कोई छूट नहीं दी गई है। छात्रों को सुविधा इसके साथ ही बोर्ड के सदस्यों ने  ओबीसी नॉन क्रीमीलेयर सर्टिफिकेट को जेईई एडवांस 2017 के लिए वैध मानने की मंजूरी भी दे दी है। छात्रों को जेईई एडवांस के लिए पंजीकरण कराने, रिजल्ट देखने और च्वाइस फिलिंग में दिक्कत न आए, इसके लिए वीडियो ट्यूटोरियल भी जारी किया जाएगा।  

     जानिए खास बातें 
    •  इस बार जेईई एडवांस के लिए 2.20 लाख छात्रों को क्वालिफाई घोषित किया जाएगा
    • समान्य श्रेणी के 1 लाख 11 हजार, ओबीसी 59 हजार 400, एससी 33 हजार, एसटी 16 हजार 500 शामिल होंगे
    • जेईई-एडवांस की परीक्षा पात्रता से संबंधित सभी शर्तें भी जारी कर दी गई हैं।
    • आईआईटी में प्रवेश के लिए विद्यार्थियों को बोर्ड पात्रता को पूरी करने के लिए केटैगिरी अनुसार अपने-अपने बोर्ड की टॉप 20 पर्सेन्टाइल में आना होगा 
    • अथवा सामान्य व ओबीसी के छात्रों के बारहवीं कक्षा में न्यूनतम 75 प्रतिशत अंक हों 
    • एसटी-एससी व शारीरिक विकलांग छात्रों को 65 प्रतिशत अंक लाने होंगे
    • जबकि पिछले साल एससी-एसटी व शारीरिक विकलांग के लिए बोर्ड पात्रता 70 प्रतिशत थी
    • वे विद्यार्थी जिन्होंने गत वर्ष जोसा काउंसलिंग के दौरान सीट असेप्टेंस फीस का भुगतान तो कर दिया था परन्तु रिपोर्टिंग सेंटर पर रिपोर्ट नहीं कर सीट स्वीकार नहीं की वे विद्यार्थी भी इस वर्ष जेईई-एडवांस परीक्षा में बैठ पाएंगे। +vineet singh 

  • किसानों के बच्चों ने जमाई आईआईटी में धाक

    भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में इस साल किसानों के बच्चों की मौजूदगी ज्यादा है। दाखिले की दौड़ में शिक्षक और पब्लिक सेक्टर में काम करने वाले अभिभावकों के बच्चों को पछाड़ कर खेती करने वालों के बच्चे चौथे पायदान तक जा पहुंचे हैं। इतना ही नहीं ग्रामीण छात्रों की मौजूदगी भी इस बार एक चौथाई रहेगी। हालांकि आईआईटीज में शहरी छात्रों का दबदबा बना हुआ है। शहरों में रहने वाले 75 फीसदी छात्र आईआईटी में प्रवेश हासिल करने में सफल रहे। इस बार जेईई एडवांस परीक्षा का आयोजन आईआईटी गुवाहटी ने करवाया था। 


    प्रवेश प्रक्रिया खत्म होने के बाद संस्थान की ओर से जारी आंकड़ों का विश्लेषण करने पर चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि सरकारी नौकरी करने वाले माता-पिता के बच्चे आईआईटी, एनआईटी और ट्रिपल आईटी में सबसे ज्यादा सफल रहे हैं।  इन संस्थानों में प्रवेश लेने वाले 36,566 छात्रों में से 10,200 के माता-पिता सरकारी नौकरी करते हैं। सफलता के पायदान पर दूसरा स्थान व्यवसायी माता-पिता का रहा। इनके 5814 बच्चों को तीनों संस्थानों में प्रवेश मिला है। प्राईवेट सेक्टर में नौकरी करने वाले अभिभावकों के 4,097 बच्चों को एडमिशन मिला। किसानों के बच्चों ने एडमिशन के मामले में प्रोफेशनल्स और पब्लिक सेक्टर में धूम मचाने वाले माता-पिताओं के बच्चों को पीछे छोड़ दिया।

    किसानों के 3213 बच्चे आईआईटी, एनआईटी और ट्रिपल आईटी में एडमिशन लेने में सफल रहे। जबकि इन संस्थानों में प्रवेश लेने वाले 2,018 छात्रों के अभिभावक पब्लिक सेक्टर में काम करते हैं और 1,700 के शिक्षक हैं। वहीं लॉ सेक्टर से जुड़े अभिभावकों के 327 बच्चे, फार्मेसी सेक्टर में काम करने वालों के 59 और आर्किटेक्ट अभिभावकों के 21 बच्चे ही दाखिला हासिल कर सके।



    सेल्फ स्टडी में दम

    आईआईटी गुवाहटी की ओर से जारी विश्लेषण में सेल्फ स्टडी करने वाले छात्रों ने दम दिखाया है। आईआईटी में एडमिशन पाने वाले 10,576 छात्रों में से 5,539 छात्रों (52.4 फीसदी) ने घर पर पढ़ाई कर आईआईटी परीक्षा क्रेक की। जबकि 4711 छात्रों यानि 44.5 फीसदी ने बताया कि उन्होंने कोचिंग संस्थानों की मदद से प्रवेश परीक्षा पास की है। दो फीसदी छात्र ऐसे थे जिन्होंने बताया कि वह कोचिंग तो नहीं गए, लेकिन प्रवेश परीक्षा पास करने के लिए किसी एक विषय का ट्यूशन जरूर लिया था।




    पूरी खबर पढ़ेंः-
     http://rajasthanpatrika.patrika.com/story/kota/indian-institutes-of-technology-iit-admission-student-farmer-s-son-2325737.html



  • लैन्टर्न टू लाइटहाउस... कदम थमे, लेकिन सफलता नहीं

    जवानी के उस मोड़ पर जब जिंदगी सबसे हसीन होती है...कदम ही साथ छोड़ दें तो लोग जीने तक से इन्कार कर देते हैं, लेकिन इस बुंदेले ने कुदरत की बेरुखी को भी रोशनी बिखेरने का जरिया बना डाला। एक लालटेन, एक मेज और एक बच्चे के साथ चल पड़ा सफलताओं की नई इबारत लिखने। इस शख्स ने कोटा कोचिंग  की नींव ही नहीं रखी, बल्कि पहला आईआईटियंस और आईआईटी-जेईई का पहला टॉपर देकर सफलताओं का ऐसा चस्का लगाया जो ढ़ाई दशक बाद भी जारी है। ऐसे शख्स की जिंदगी के सफरनामे को  उसके आईआईटियंस छात्र ने ही एक किताब की शक्ल दी और नाम रखा... वीके बंसल्स जर्नी, फ्रॉम लैन्टर्न टू लाइट हाउस। 

    सिटी मॉल में हर ओर तालियों की गडग़ड़ाहट गूंज रही थी। नामी कोचिंग संस्थानों के प्रबंध निदेशक और निदेशक एक ही जगह पर मौजूद थे। मौका था कोटा में कोचिंग की नींव रखने वाले बंसल क्लासेज के संस्थापक वीके बंसल की जीवनी के विमोचन का। आईआईटियंस सचिन झा ने अपने शिक्षक के जिंदगी के हर पहलू को इस किताब में सहेजा है। झांसी में जन्म के बाद लखनऊ में पढ़ाई और फिर कोटा में नौकरी की शुरुआत। शादी के कुछ साल बाद ही पैरों का साथ छोड़ देना और उसके बाद शुरू हुए संघर्ष से कोटा कोचिंग का जन्म और सफलताओं के निर्बाध दौर की कहानी इस किताब में बखूबी है। 

    रेजोनेंस के प्रबंध निदेशक आरके वर्मा ने वीके बंसल से मिले पहले सबक को साझा किया। उन्होंने बताया कि 5 मई 1995 के दिन फैकल्टी के तौर पर बंसल क्लासेज ज्वाइन की थी। कुछ दिन बाद ही बंसल सर ने अचानक बुलाया और फिजिक्स की डेली प्रॉब्लम प्रेक्टिस से एक सवाल हल करने को कहा। मैने कर दिया, लगा बात बन गई, लेकिन तब बंसल सर ने कहा कि शिक्षक को ज्ञान हो यह पहली जरूरत है, लेकिन उससे छात्र भी इस ज्ञान से वाकिफ हों तभी शिक्षा की सार्थकता है। 

    इस फार्मूले का तोड़ नहीं...


    उन्होंने कहा, कोचिंग संस्थानों में डीपीपी से लेकर डेढ़ घंटे की क्लास तक का फार्मूला बंसल सर ने बनाया और आज सभी इसे फॉलो कर रहे हैं। इसका तोड़ कोई नहीं तलाश सका।  कैरियर पाइंट के निदेशक ओम माहेश्वरी ने बताया कि 1992 में जब उन्होंने कोचिंग की शुरुआत की तो पहला फोन बंसल सर का ही आया और पूछा कि क्या पढ़ाओगे, तब से लेकर आज तक उनका मार्ग दर्शन मिल रहा है। 

    मोशन के प्रबंध निदेशक नितिन विजय ने कहा कि बंसल क्लासेज आईआईटियंस ही नहीं उन्हें पढ़ाने वाले शिक्षक भी तैयार करता है। मैं वहीं पढ़ा और यहीं से पढ़ाना सीखा। किताब के लेखक सचिन झा ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि जब जिंदगी में सबसे ज्यादा अंधेरा दिखे तो इस किताब को पढऩा। यह बताएगी कि सब कुछ खो चुके आदमी का साहस सफलताओं की नई कहानी कैसे लिखता है। इस अवसर पर वीके बंसल की पत्नी नीलम बंसल, समीर बंसल, नीलेश गुप्ता, एके तिवारी और गौरव यादव आदि लोग मौजूद थे।
    पूरी खबर पढ़ेंः- http://rajasthanpatrika.patrika.com/story/kota/bansal-coaching-classes-founder-vk-bansal-biography-release-at-kota-2312428.html


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