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मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से जारी सर्कुलर के मुताबिक एनआईआरएफ में ए रैंक हासिल करने वाले उच्च शिक्षण संस्थानों को पूर्ण स्वायत्तता दी जाएगी। पढ़ाई, परीक्षा से लेकर अपनी मर्जी से पैसा खर्च करने तक की इजाजत। वहीं बी कैटेगरी हासिल करने वाले संस्थानों को पहले शैक्षणिक स्वायत्तता लेकर खुद को साबित करना होगा। इसके बाद ही उनको आर्थिक स्वायत्तता देने पर विचार किया जाएगा। हालांकि सी कैटेगरी हासिल करने वाले और एनआईआरएफ की लिस्ट में शामिल न हो सकने वाले शिक्षण संस्थानों को सरकारी कानूनों के शिकंजे में ही रखा जाएगा। ताकि उनकी गुणवत्ता सुधारी जा सके।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय दूसरी बार एनआईआरएफ के लिए पंजीकरण करवा रहा है, लेकिन कोटा से सिर्फ कोटा विश्वविद्यालय ने ही इसके लिए पंजीकरण किया है। जबकि राजस्थान तकनीकि विश्वविद्यालय, वीएमओयू और कृषि विश्वविद्यालयों की बात तो छोडि़ए किसी भी राजकीय महाविद्यालय ने इसके लिए आवेदन करने तक की जरूरत नहीं समझी। शिक्षाविदों को इसके साथ ही एनआईआरएफ के जरिए रैंक देने के तरीके पर भी सवाल उठाए हैं। पहली बार जारी की गई रैंक में कोटा विश्वविद्यालय समेत तमाम शिक्षण संस्थानों ने फर्जी आंकड़े प्रस्तुत किए थे। जिनकी जांच तक नहीं की गई। शिक्षाविदों का कहना है कि सरकार पहले रैंक देने का तरीका सुधारे उसके बाद स्वायत्तता का सिगूफा छोड़े।



